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Saturday, July 7, 2007

संत कबीर वाणी:सरवर तरवर संत जन

NARAD:Hindi Blog Aggregator

सरवर तरवर सन्त जन, चौथा बरसे मेह
परमारथ के कारने, चारों धारी देह
सरोवर,वृक्ष, संतजन और चौथा मेह का बरसना ये चारों परोपकार के लिए ही प्रकट है सरोवर, वृक्ष और बादल तो जड़ हैं। संतों की परोपकारिता से किसी की बराबरी नहीं हो सकती।

1 comment:

अनुनाद सिंह said...

तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पिअहिं न नीर |
परमारथ के कारने , साधुन धरा शरीर ||

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