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Thursday, July 19, 2007

चाणक्य वाणी: विद्या है कामधेनु के समान

NARAD:Hindi Blog Aggregator

  1. मछली दर्शन से, कछ्वों ध्यान से, पक्षी स्पर्श से अपने बच्चों को पालते हैं, उस प्रकार सज्जनों की भी संगति में मनुष्य पलते हैं।
  2. विद्या कामधेनु के समान गुण वाली है। वह असंभव में भी फल देती है। विदेश में वह भाई के समान है। वह एक प्रकार का गुप्त धन है। इस कारण विद्या और ज्ञान का संचय अवश्य करना चाहिए।
  3. सामर्थ्य के आगे कोई वस्तु भारी नहीं। व्यापारी के लिए कोई देश दूर नहीं, विद्वान् के लिए कोई देश पराया नहीं और मधुर बोलने वाले के लिए कोई पराया नहीं।

1 comment:

परमजीत बाली said...

बहुत सही बात प्रेषित की है।

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