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कोयला भी हो उजळा, जरि बरि है जो सेव
मूरख हो न उजळा, ज्यों कालर का खेत
संत कबीरदास जी का कहना है कि भली-भांति जलकर कोयला भी उजला हो जाता है, परन्तु मूर्ख का सुधरना उसी प्रकार नहीं होता जैसे ऊसर खेत में बीज नहीं उगते।
संकलक,लेखक संपादक-दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’,ग्वालियर(मध्यप्रदेश) Writer and Editor-Deepak Raj Kukreja, BharatDeep, Gwalior (Madhya Pradesh)
1 comment:
जारी रखें. बढ़िया चल रहा है.
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