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Wednesday, April 11, 2007

ख्वाब,सपने और हकीकत

मेरे अंतर्मन में तेरी तस्वीर है
तू मेरे सामने हो अब इसकी जरूरत नहीं
वह कोई और होंगे जो तेरे दीदार
करने तेरे घर के दरवाजे की और
टकटकी लगाए खडे होंगे
मैं तो दिल मैं ही दीदार कर
तसल्ली कर लेता हूँ
मेरी कामना यह नहीं है कि
तू मुझे छूकर मेरे जिस्म में
बहार से नहला दे
मेरी तो बस चाहत है कि
मेरे मन में उम्मीद के चिराग
हमेशा जलाये रखना
तू रोशनी कर मेरे घर में
मुझे इसकी जरूरत नहीं
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जो ख्वाबों के ही दिए जलाते हैं
सच से वही घबडा ते हैं
सपनों में ही बसाते हैं अपनी दुनिया
असलियत से हार जाते हैं।
जो हकीकत के रास्ते चलते हैं
अपने दुःख और सुख के साथ
वही जीवन पथ पर आने वाली
मुश्किलों से पार हो पाते हैं
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