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Thursday, June 12, 2008

मनुस्मृतिःबड़े भाई, पत्नी और पुत्र के साथ विवाद न करें

न पाणिपादचपलो न नेत्रचपलोऽनृजः।
न स्याद्वाक्चपलश्चैव न परद्रोहकमैधीः।।


हिंदी में भावार्थ-अकारण हाथ-पैर नहीं हिलाना चाहिये न नेत्रों या शरीर को मटकाना चाहिए। स्वभाव से कुटिल, दूसरों की निंदा करने वाला भी नहीं बनना चाहिए।

आकाशेशास्तु विज्ञेयाः बालवृद्धकृशातुराः।
भ्राता ज्येष्ठः समः पित्रा भार्या पुत्रः स्वका तनुः


हिंदी के भावार्थ बालक, बूढ़े, कमजोर और आतुर भाव से हमारी और आशा से देखने वाले लोग आकाश के स्वामी होते हैं। अतः इनका पालन-पोषण करना सामान्य मनुष्य का का धर्म है। बड़ा भाई पिता के समान तथा पत्नी एवं पुत्र अपने शरीर के समान है। इनके साथ किसी तरह का विवाद करना व्यर्थ है।

4 comments:

mamta said...

हुम्म !

सही कहा।

Udan Tashtari said...

सही सीख.आभार.

Udan Tashtari said...

सही सीख.आभार.

Suresh Chandra Gupta said...

सही बात है. आज के तनाव पूर्ण जीवन में इन मंत्रों पर आचरण करना और अधिक जरूरी हो गया है.

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