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Friday, February 29, 2008

संत कबीर वाणी:धुम्रपान से होती है हिंसा

पानी पिरथीके हते, धुवाँ सुनि के जीव

हूके में हिंसा घनी, क्यों कर पीवै पीव

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि धूम्रपान (हुक्के) के दुर्गन्धयुक्त गंदे पानी से पृथ्वी को बहुत हानि होती है। क्योंकि उससे कई छोटे जीवों की मृत्यु होती है इसलिए उसे कभी पीना नहीं चाहिए। आखिर लोग इसे क्यों पीना चाहते हैं।

छाजन भोजन हक्क है, और अनाहक लेय

आपन दोजख जात है, औरों दोजख देय

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन निर्वाह का अधिकार है और वह अनुचित रूप से उन पदार्थों को लेता है जो उसे नहीं लेना चाहिए। इस प्रकार ऐसा व्यसनी बनकर वह अपने आप तो नरक में जाता है साथ ही दूसरों को ले जाता है।

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