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Saturday, July 21, 2007

चाणक्य वाणी: तिनकों की एकता

NARAD:Hindi Blog Aggregator
  1. एकता में बहुत शक्ति होती है। बिखरे हजारों तिनकों को हाथी रौंद डालता है, वह सब मिलकर ढाका के रुप में उसे वश में कर लेते हैं। तलवार का वार भी वर्षा के मेघ तृण समूह को काट नहीं सकता।
  2. जल में तेल पड़ते ही थोडी मात्रा में विस्तार आ जाता है।
  3. दुष्ट व्यक्ति से कही गुप्त बात बिजली की गति से फैलती है।

1 comment:

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया।

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