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Thursday, May 22, 2008

संत कबीर वाणी:अंहकार की रस्सी बांधकर भवसागर पार करना कठिन

मोर तोर की जेवरी, गल बंधा संसार
दास कबीरा क्यों बंधै, जाके नाम अधार


संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि तेरे मेरे की रस्सी से बंधा आदमी इस संसार को पार करना चाहता है। परमात्मा के जो सच्चे भक्त है उनको इस संासरिक मोह माया से लगाव नहीं होता वह तो केवल भगवान के नाम से बंधे होते हैं।

नान्हा काती चित्त दे, महंगे मोल बिकाय
ग्राहक राजा राम है, और न नीरा जाय


संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि अपने हृदय को एकाग्र कर परमात्मा के नाम लेकर ज्ञान के रूप में सूत कातो। उसके ग्राहक तो भगवान राम है जो घट घट वासी है। अन्य किसी के पास जाने का कोई लाभ नहीं है।

2 comments:

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

बहुत बहुत धन्यवाद कबीरवानी को भावार्थ सहित उपलब्ध करवाने के लिए

Udan Tashtari said...

आभार.

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