Sunday, 16 March, 2008

संत कबीर वाणी:प्रेम-प्रेम तो सब करते हैं पर उसका मार्ग कोई नहीं जानता

दुनिया ऐसी बावरी, पाथर पूजन जाहि
घर की चकिया कोऊ न पूजै, जी को पीसो खाहि



संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि दुनिया के लोग इतने बावले हैं कि घर के बाहर पत्थरों को पूजने जाते हैं पर घर में मौजूद पत्थर की चक्की को नहीं पूजते जिसका पीसा हुआ आटा खाते हैं।


प्रेम-प्रेम सब कोई कहैं, प्रेम न चीन्है कोय
जा मारग साहिब मिलै, प्रेम कहावै सोय


संत शिरोमणि कबिदास जी कहते हैं कि संसार में सभी लोग प्रेम-प्रेम टू करते हैं किन्तु प्रेम का मतलब कोई नहीं जानता। जिस रास्ते पर चलकर परमात्मा का दर्शन होता है वही सच्चा प्रेम का मार्ग हैं।

3 comments:

रवीन्द्र प्रभात said...

प्रेरक है,अच्छा लगा पढ़ कर !

mahendra mishra said...

प्रेरक प्रसंग बहुत बढ़िया

परमजीत बाली said...

प्रेरणादायक प्रस्तुति।सुन्दर!