दीपक सुन्दर देखि करि, जरि जरि मरे पतंग
बड़ी लहर जो विषय की, जरत न मोरे अंग
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं जलते हुए दीपक की रौशनी को देखकर पतंगे जल-जल कर मर जाते हैं। उसी प्रकार जब मनुष्य के मन में विषयों की लहर हमेशा उठती है और वह उसमें बहता रहता है-उसे अपने जीवन मरण का विचार ही नहीं रहता।
सहकामी दीपक दसा, सौंखें तेल निवास
कबीर हीरा संत जन, सहजै सदा प्रकाश
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि जिसमें कामवासना अधिक होती है उसकी दशा दीपक के समान होती है जो जलते हुए अपने तेल को भी चूस लेता है जबकि वह उसकी ऊजा का स्त्रोत होता है और उसके समाप्त होने पर दीपक स्वयं भी बुझ जाता है। इसके विपरीत संत लोग हीरे के समान होते हैं जिनकी तपस्या का प्रकाश चारों और फैलता है।
समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढ़ें-
पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका
हिंदी मित्र पत्रिका
यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं।
लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर
Saturday, March 15, 2008
संत कबीर वाणी:विषयी लोग दीपक और संत हीरे समान होते हैं
Labels:
adhyaatm,
bharatdeep,
dharm,
dohe,
hindi article,
kabir,
ज्ञान,
सत्संग,
संदेश,
समाज,
हिन्दी साहित्य,
हिन्दू
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment