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Monday, December 29, 2008

कबीर वाणी: कायर पीठ पीछे ही वार करता है

कबीर तो सांचै मतै, सहै जू सनमुख वार
कायर अनी चुभाय के, पीछे झखै अपार


संत शिरोमणि कबीरदास जी कहत हैं कि सच्चा वीर तो वह है जो सामने आकर लड़ता है पर जो कायर है वर पीठ पीछे से वार करता है।

तीर तुपक सों जो लड़ैं, सो तो सूरा नाहिं
सूरा सोइ सराहिये, बांटि बांटि धन खांहि

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि जो अस्त्र शस्त्र से लड़ते है। उनको वीर नहीं कहा जा सकता है। सच्चे शूरवीर तो हैं जो आपस में मिल बैठकर खाते हैं। वह जो भी कमाते हैं उसे समान रूप से आपस में बांटते हैं।

वर्तमान सन्दर्भ में संपादकीय व्याख्या-शूरवीर हमेशा उसे ही माना जाता है जो अस्त्र शस्त्र का उपयोग करता है। उनमें भी वही वीर है जो सामने से वार करता है पर जो कायर हैं वह पीठ पीछे वार करते हैं। वैसे अस्त्र शस्त्र से लड़ने में भी साहस की आवश्यकता कहां होती है। अगर अस्त्र शस्त्र हाथ में हों तो वेसे भी मनुष्य के मन में दुस्साहस आ ही जाता है और कोई भी उपयोग कर सकता है। कुछ लोग कहते हैं कि हथियार रखने से क्या होता है उसे चलाने के लिये साहस भी होना चाहिये-विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर लोहे से बना कोई हथियार मनुष्य के हाथ में हो तो उसमें आक्रामता आ ही जाती है।

असली साहस तो अपने कमाये धन का दूसरे के साथ बांटकर खाने में दिखाना चाहिये। आदमी जब धन कमाता है तो उसके प्रति उसका मोह इतना हो जाता है कि वह उसे किसी को थोड़ा देने में भी हिचकता है। मिलकर बांटने की बात तो छोडि़ये अपनी रोटी का छोटा टुकड़ा देने में भी आदमी की जान जाती है।

हमारे प्राचीन मनीषियों ने दान की महिमा को इसलिये प्रतिपादित किया कि समाज में सामाजिक समरसता का भाव रहे। हमारे अध्यात्म में इतना तक कहा गया है कि किसी को दान देते हुए आंखें नीची करना चाहिये ताकि दूसरे को हमारा अहंकार नहीं दिखाई दे और उसके अंदर अपने प्रति कुंठा भाव न उत्पन्न हो। मगर अब तो समाज कल्याण की बात राज्य के भरोसे छोड़ दी गयी है और वही लोग जन कल्याण के लिये मैदान में उतर रहे हैं जिनको उससे कुछ आर्थिक फायदा है। यह लोग कायर होते हैं क्योंकि दान और कल्याण क लिये प्राप्त धन का वह हरण करते हैं।

कलुषित तरीके से प्राप्त धन का भी वह दान करने का साहस नहीं कर पाते। अपने धन देने में सभी का हृदय कांपने लगता है। सच है कि जो दानी है वही सच्चा शूरवीर है। वह भी सच्चा वीर है जो अस्त्र शस्त्र लेकर कहकर सामने से प्रहार करता है पर आजकल तो कायरों की पूरी फौज है जो पीठ पीछे से वार करती है। चोर और डकैतों द्वारा किये गये और अपराध और निरंतर बम धमाकों की बढ़ती घटनायें इस बात का प्रमाण हैं।
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संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप

Friday, August 10, 2007

कबीर वाणी: निंदक से कुत्ता भी भला

निन्दक ते कुता भला, हट कर माँडै शर
कुत्ते ते क्रोधी बुरा, गुरू दिलावै गार
निंदा से बहुत भला तो कुता है, जो कि दूर हटकर भौंकता है। परंतु कुत्ते से भी अधिक क्रोध करने वाल निंदा बुरा है जो अपने गुरू को गाली दिलवाता है। लोग सोचते हैं कि जब यही ऐसा अज्ञानी और परनिन्दा करने वाला है तो इसका गुरू भी ऐसा ही होगा।

Monday, June 25, 2007

कबीर वाणी:जंत्र मन्त्र सब झूठ है

NARAD:Hindi Blog Aggregator

बोलै बोल विचारि के, बैठे ठौर संभारि
कहैं कबीर ता दास को, कबहु न आवै हारि
इसका आशय यह है कि जो आदमी वाणी के महत्त्व को जानता है,, समय देखकर उसके अनुसार सोच और विचार कर बोलता है और अपने लिए उचित स्थान देखकर बैठता है वह कभी भी कहीं भी पराजित नहीं हो सकता।
जंत्र मन्त्र सब झूठ है, मति भरमो जग कोय
सार शब्द जाने बिना, कागा हंस न होय
संत शिरोमणि कबीरदास जीं का यह आशय है कि यन्त्र-मन्त्र एवं टोना-टोटका आदि सब मिथ्या हैं। इनके भ्रम में मत कभे मत आओ। परम सत्य के ठोस शब्द-ज्ञान के बिना, कौवा कभी भी हंस नहीं हो सकता अर्थात दुर्गुनी-अज्ञानी लोग कभे सदगुनी और ज्ञानवान नही हो सकते

Thursday, June 21, 2007

संत कबीर वाणी

NARAD:Hindi Blog Aggregator
जाके जिव्या बन्धन नहीं, हृदय में नहीं सांच
बाके संग न लागिये , खाले वटिया काँच
इसका आशय यह है कि जिस व्यक्ति का अपनी वाणी पर नियंत्रण नहीं है और उसके हृदय में भी सत्य नहीं है उसके साथ रहकर भी तुम्हें कुछ भी प्राप्त नहीं हो सकता।
साधू , सती और सूरमां राखा रहे न ओट
माथा बाँधी पताक सौं, नेजा भाले चोट
आशय यह कि साधू, और शूरवीर को किसी पर्दे की जरूरत नहीं होती, इनके आचरण रूपी ध्वजा उनके मस्तक के साथ रहती है, चाहे कोई भी उन पर अपने भाले से चोट करे। यह लोग अपने प्राणों को त्याग देंगे पर अपने सिद्धांत से नहीं हटेंगे ।
सूचना- सुधि पाठकों से निवेदन है कि इसमें भाषा के संबंध में पूर्ण सावधानी रखने का प्रयास किया गया है कोई त्रुटि हो तो लेखक के इस भाव को समझें कि इन्टरनेट पर अपने ढंग से भारतीय दर्शन और आध्यात्म का प्रचार करना चाहता है ,और आप उसे क्षमा करें ।

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