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Sunday, October 28, 2007

शब्द जो बारूद बन गए

हमने कुछ कहा
उन्होने कुछ और सुना
समझा कुछ और
लोगों को कुछ और बताने लगे
शहर में हो रही थी चर्चा
हमारे कहे की
जो शब्द हमने कहे ही नहीं
लोग हमें बताने लगे
दिल से उनकी भलाई के लिए
बोले गए शब्द ही हमें
शहर में बदनाम कराने लगे
हम जलते रहे उस आग में
जिसे लोग हमारी चिगारी
से लगी जताने लगे
हम सोचते हैं लोगों से
कोई शब्द बोलने से तो अच्छा है
खामोशी ओढ़ लें
ऐसे कीमती शब्द उन्हें देने से क्या फ़ायदा
जो बारूद बनाकर हमें ही उडाने लगे

Monday, June 18, 2007

क्योंकि लोकतंत्र है!

NARAD:Hindi Blog Aggregator
उसने पूछा तुम 'चिल्लाते क्यों हो'
जवाब मिला' क्योंकि लोकतंत्र है'

उसने पूछा 'अपशब्द क्यों कह रहे हो'
जवाब मिला 'क्योंकि लोकतंत्र है'

उनसे पूछा 'डंडा लेकर क्यों घुमते हो
जवाब मिला 'क्योंकि लोकतंत्र है'

उसने पूछा 'आख़िर लोकतंत्र
का क्या मतलब
चीखना-चिल्लाना,अपशब्द कहना,
और डंडे घुमाना '
जवाब आया 'क्योंकि लोकतंत्र है'

थक-हारकर उसने प्रश्न पूछना छोड़ दिया
फिर भी वहाँ से आवाज आती रही
'क्योंकि लोकतंत्र है
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